//अभी बारिश के मौसम को देखते हुए किसान भाई करें खेती-बाड़ी के यह काम

अभी बारिश के मौसम को देखते हुए किसान भाई करें खेती-बाड़ी के यह काम

किसानों के लिए मौसम के अनुसार खेती-बाड़ी के लिए सलाह

देश में मौसम में लगातार परिवर्तनशील है जैसे अभी शीतलहर के चलते बहुत अधिक ठण्ड के कारण कई स्थानों पर पाला पड़ने से फसलों को नुकसान पहुंचा है | वहीँ अब मौसम ने करवट ली है जिसके कारण कई राज्यों में कई स्थानों पर बारिश एवं ओलावृष्टि की सम्भावना है | ऐसे में किसानों को अभी खेती बाड़ी के क्या कार्य करना चाहिए इसके लिए कृषि वज्ञानिकों ने किसानों के लिए मौसम सलाह जारी है |

फसलों पर हो सकता है इन कीट रोगों का प्रकोप

वर्षा होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए खेतों में जल निकास की उचित व्यवस्था करें। लगातार बदली एवं वर्षा को देखते हुए भी फसलों में सिचाई तथा किसी भी प्रकार का छिडकाव ना करें। गेहूँ की फसल में यदि दीमक का प्रकोप दिखाई दे तो बचाव हेतु किसान क्लोरपायरीफाँस 20 ई.सी. 2.0 ली. प्रति एकड़ 20 कि.ग्रा. बालू में मिलाकर खेत में शाम को छिड़क दे। मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानो को सलाह है कि सरसों की फसल में चेंपा कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। प्रारम्भिक अवस्था में प्रभावित भाग को काट कर नष्ट कर दे |

दलहन तिलहन एंव सब्जी वाली फसलों में माहू (एफिड) के प्रकोप की आशंका है। इसके लिए सतत निगरानी रखे एवं प्रारंभिक प्रकोप दिखने पर नीम आधारित कीटनाशकों का छिडकाव करें। चने की फसल में फली छेदक कीट की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ खेतों में लगाएं जहां पौधों में 10-15% फूल खिल गये हों। “T” अक्षर आकार के पक्षी बसेरा खेत के विभिन्न जगहों पर लगाए।

गोभीवर्गीय फसल में हीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक तथा टमाटर में फल छेदक की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड खेतों में लगाएं। गेंदे की फसल में पूष्प सड़न रोग के आक्रमण की निगरानी करते रहें। यदि लक्षण दिखाई दें तो बाविस्टिन 1 ग्राम/लीटर अथवा इन्डोफिल-एम 45 @ 2 मिली./लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव आसमान साफ होने पर करें।

इन फसलों में करें खाद का प्रयोग

इस मौसम में तैयार खेतों में प्याज की रोपाई करें। रोपाई वाले पौध छ: सप्ताह से ज्यादा की नही होने चाहिए। पौधों को छोटी क्यारियों में रोपाई करें। रोपाई से 10-15 दिन पूर्व खेत में 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद डालें। 20 कि.ग्रा. नत्रजन, 60-70 कि.ग्रा. फ़ॉस्फोरस तथा 80-100 कि.ग्रा. पोटाश आखिरी जुताई में ड़ालें। पौधों की रोपाई अधिक गहराई में ना करें तथा कतार से कतार की दूरी 15 से.मी. पौधे से पौधे की दूरी 10 से.मी. रखें।

मटर की फसल पर यूरिया या पोटेशियम सल्फेट 2 % के घोल का छिड़काव करें। जिससे मटर की फल्लियों की सख्याँ में बढोतरी होती है साथ ही फसल का पाले से भी बचाव होता है।

यह मौसम गाजर का बीज बनाने के लिए उपयुक्त है अत: जिन किसानों ने फसल के लिए उन्नत किस्मों की उच्च गुणवत्ता वाले बीज का प्रयोग किया है तथा फसल 90-105 दिन की होने वाली है,वे जनवरी माह के प्रथम पखवाडें में खुदाई करते समय अच्छी, लम्बी गाजर का चुनाव करें, जिनमे पत्ते कम हो। इन गाजरों के पत्तो को 4 इंच का छोड़ कर उपर से काट दें। गाजरों का भी उपरी 4 इंच हिस्सा रखकर बाकी को काट दें। अब इन बीज वाली गाजरों को 45 से.मी. की दूरी पर कतारों में 6 इंच के अंतराल पर लगाकर पानी लगाए।

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