//किसान गन्ने की फसल में रेड-रॉट (गन्ने का कैंसर) रोग के प्रकोप की रोकथाम ऐसे करें

किसान गन्ने की फसल में रेड-रॉट (गन्ने का कैंसर) रोग के प्रकोप की रोकथाम ऐसे करें

गन्ने की फसल में रेड-डॉट (लाल-सडन) रोग

देश में मानसून का मौसम चल रहा है, कई स्थानों पर लगातार बारिश एवं जल भराव के चलते फसलों में कई तरह के कीट रोग लगने की सम्भावना रहती है | इस मौसम में गन्ने की फसल में गन्ने के कैंसर के रूप में विख्यात रेड-रॉट (लाल-सडन) रोग के प्रकोप का खतरा बना रहता है | ऐसे में रेड-रॉट (लाल-सडन) रोग के प्रकोप की रोकथाम/ प्रभावी नियंत्रण हेतु समस्त गन्ना क्षेत्रों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने ऐडवाइजरी जारी करते हुए इस रोग से प्रभावित क्षेत्रों में बीज प्रतिस्थापन हेतु माइक्रोप्लान तैयार कर उसका क्रियान्वन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किये गए हैं |

रेड-डॉट (लाल-सडन) रोग की पहचान

गन्ने में लाल सडन रोग कोलेटोट्रायकम फाल्केट नामक फफूंद के कारण होता है | इस फफूंद से प्रभावित पौधों की तीसरी और चौथी पत्तियां पीली पड़ कर सूखने लगती है | गन्ने की गांठों तथा छिलके पर फफूंदी के बीजाणु विकसित हो जाते हैं | लाल सडन से ग्रसित गन्नों पर इसके आंतरिक उत्तकों पर लाल रंग के बीच में सफ़ेद रंग के धव्वे दिखाई देते हैं | गन्नों का पूरा गुदा लाल भूरे फफूंद के धागों से भर जाता है | इसे सूंघने पर अल्कोहल जैसी गंध आती है |  

रेड-रॉट (लाल-सडन) रोग से बचने के लिए लगाये गन्ने की यह किस्में

गन्ने में वर्षा काल के समय रेड-रॉट रोग का प्रकोप अत्यधिक होने की संभावना होती है | यह रोग गन्ने में बीज के माध्यम से फैलता है तथा ऐसी गन्ना प्रजातियाँ जो लम्बे समय से कृषकों द्वारा बोई जा रही है उनमें अनुवांशिक हास होने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है और उन प्रजातियों में रोड-रॉट बीमारी लगने की सम्भावन बढ़ जाती है | इस बीमारी से गन्ने की फसल में बहुत अधिक नुकसान होता है | इस नुकसान से बचने के लिए वैज्ञानिक संसुतिय्याँ है की कम से कम 40 प्रतिशत गन्ना क्षेत्रफल में को.0283 के स्थान पर नई अगेती गन्ना प्रजातियाँ जैसे- को. 0118, को.शा.-08272 को. 98014 आदि की बुआई की जाए तथा किसी खेत में गन्ने के रोग ग्रस्त होने पर उसमें गन्ना न बोकर अन्य फसलों के साथ फसल चक्र पद्धति अपनाई जाये |

रेड रॉट गन्ने का कैंसर रोग की रोकथाम के लिए यह कार्य करें

जिन जगहों पर रेड-रॉट से प्रभावित क्षेत्रों में केवल शरदकालीन गन्ने की बुआई ही की जानी चाहिए तथा शीत एवं वर्षा ऋतू के मध्य गन्ने के स्थान पर अन्य फसलों की खेती की जाए | जिन क्षेत्रों में रेड-रॉट रोग का प्रभाव 20 प्रतिशत से अधिक है वहां गन्ने की ततकाल कटाई कर दी जाए और प्रभावित खेतों की गहरी जुताई कर गन्ना बीज पैदा करने तथा सिंगल बड सैटस कार्बेन्डाजिम के 2 ग्राम प्रति लीटर घोल में बुआई से पूर्व आधे घंटे तक डुबाने के उपरांत ही गन्ना बुआई की सलाह दी गई हैं साथ ही ट्राईकोडर्मा कल्चर फोर्टीफाईड आर्गेनिक का प्रयोग भी इस रोग से बचाव हेतु आवश्यक है | जिन क्षेत्रों में नम, गर्म वायु बीज उपचार सयंत उपलब्ध है वहाँ शत-प्रतिशत बीज उप्यान्त्रों से शोधन कर बुआई के निर्देश दिए गए हैं |

प्रभावित क्षेत्रों के आस-पास जहाँ गन्ने की फसल है उन क्षेत्रों में सितम्बर माह तक कड़ी निगरानी करने तथा कल्ले तथा कल्ले निकलने की अवस्था में रेड-रॉट रोग का प्रभाव बढ़ने पर प्रभावित पौधों को निकाल कर नष्ट करने और शेष फसल पर सिस्टमेटिक फंजीसाइड जैसे: कार्बेन्डाजिम, थियोफैनेटे मेथाइल आदि का प्रयोग प्रत्येक माह के अन्तराल पर किया जाना आवश्यक है |

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