//गेंहूँ की समय से बुआई

गेंहूँ की समय से बुआई

समय पर गेंहूँ की बुआई क्या है?

– गेंहूँ रबी मौसम की सबसे महत्वपूर्ण फसल है।

– गेंहूँ की उपज पर समय से बुआई का सीधा असर पड़ता है।

– 15 अक्तूबर से 15 नवम्बर तक बोई गई गेंहूँ की फसल सबसे अधिक उपज देती है।

– देर से पकने वाली गेंहूँ के प्रभेद की 11-25 दिसम्बर तक की बुआई भी औसत उपज देती है।

गेंहूँ की समय से बुआई क्यों करें?

– गेंहूँ की समय से बुआई  करने से अधिक उत्पादन प्राप्त होता है।

– गेंहूँ की फसल के बाद गरमा फसल की बुआई समय से की जा सकती है।

– गेंहूँ के साथ अंतवर्ती फसल को लगाकर अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

गेंहूँ की समय से बुआई  कैसे करें?

– गेंहूँ की समय से बुआई दो तरह से की जा सकती है।

– एस.डब्लू.आई विधि से गेंहूँ की खेती करने से कम लागत एवं कम समय में गेंहूँ की बुआई  का सकते हैं।

– जीरो टिलेज मशीन की सहायता से गेंहूँ की बुआई  बहुत आसानी से बड़े क्षेत्रफल में की जा सकती है।

– कम्बाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई वाले क्षेत्रों में टर्बो सीडर मशीन से गेंहूँ की खेती धान के ठूंठ के साथ जा सकती है।

– प्रचलित तरीके से धान की कटाई वाले क्षेत्रों में रेज्ड बेड प्लान्टर मशीन से भी गेंहूँ की खेती की जा सकती है और न्यूनतम पानी में अधिकतम उपज प्राप्त की जा सकती है।

– पर्याप्त नमी वाले खेतों में छिटकवाँ विधि से भी गेंहूँ की बुआई  समय से की जा सकती है।

समय से गेंहूँ बुआई का प्रभाव

– समय से बोई जाने वाली गेंहूँ के प्रभेद की बुआई 15 नवम्बर से 10 दिसम्बर तक करें से सबसे अच्छी उपज प्राप्त होती है।

–  गेंहूँ की विलंब से बुआई (11 दिसम्बर के बाद) करने पर 35 किलो प्रति हेक्टेयर उपज में कमी होती है।

– अत्यंत विलबं से गेंहूँ की बुवाई 15  दिसम्बर के बाद) करने पर 50-60  किलो प्रति हेक्टेयर उपज में कमी होती है।

– समय पर गेंहूँ की बुआई करने से गेंहूँ में क्रांतिक जड़ों का काफी विकास होता है।

– क्रांतिक जड़ों के विकसित होने से गेंहूँ के एक दाने से अधिकतम कल्ले निकलते हैं।

– फसल का तेजी से एवं समान रूप से विकास होता है।

– फसल की वानस्पतिक वृद्धि एवं प्रजनन  अवस्था के लिए पर्याप्त समय मिलता है।

– मौसम परिवर्तन के परिपेक्ष्य में फसल का जोखिम बहुत कम हो जाता है।

विशेष  जानकारी के लिए कहाँ संपर्क करें?

– जिला स्तर पर जिला कृषि पदाधिकारी अथवा परियोजना निदेशक, आत्मा से संपर्क करें।

– प्रखंड स्तर पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी अथवा प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क करें।

– पंचायत स्तर पर कृषि समन्वयक अथवा पने गाँव के कृषक सलाहकार से संपर्क किया जा सकता है।

– निकट के कृषि विश्वविद्यालय/कृषि महाविद्यालय/कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विशेषज्ञ से उचित सलाह प्राप्त की जा सकती है।

– किसान कॉल सेंटर से विशेषज्ञ से निःशुल्क सलाह के लिए 1800 180 1551 पर फोन करके भी सलाह प्राप्त की जा सकती है। यह सुविधा निःशुल्क है।

स्त्रोत: कृषि विभाग, बिहार सरकार

गेहूं की बुआई और प्रमुख प्रभेद



गेहूं की बुआई और प्रमुख प्रभेद

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