//ग्राउंड रिपोर्टः मुश्किल में किसान…गेहूं खरीद में देरी आगे भी देगी दर्द

ग्राउंड रिपोर्टः मुश्किल में किसान…गेहूं खरीद में देरी आगे भी देगी दर्द

उत्तर प्रदेश में कुल 55 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 1,50,000 मीट्रिक टन भारतीय खाद्य निगम सीधे खरीद करेगा, बाकी का राज्य की एजेंसियां खरीदेंगी। हालांकि कर्मचारियों की बेरुखी से किसान केंद्रों पर कम आ रहे हैं।

  अपर खाद्य आयुक्त सुनील कुमार बताते हैं, गेहूं खरीद के लिए 5189 केंद्र बनाए गए हैं, 21 अप्रैल तक कुल 1,03,196 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। पीलीभीत के किसान लालू मिश्रा ने अपना गेहूं सरकारी खरीद केन्द्रों पर न बेच कर एक फ्लोर मिल को बेच दिया, वो भी उधार। लालू कहते हैं, इस समय मंडी का रेट 1700 रुपये प्रति क्विंटल है, ऊपर से प्रति क्विंटल पर एक किलो कर्दा उसके बाद एक प्रतिशत मुद्दत देनी पड़ती है, ये सब किसान के पास से जाता है।

खुले बाजार में गेहूं का भाव कम होने का बड़ा कारण है इसकी डिमांड न होना है। इसे समझाते हुए सीतापुर की नवीन गल्ला मंडी में पसरे सन्नाटे को दिखाते हुए आढ़ती और यूपी राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष विनय गुप्ता कहते हैं, पिछले साल इस समय तक मंडी में हर रोज 30,000 क्विंटल तक गेहूं का करोबार होता था, जबकि इस साल मात्र 10 प्रतिशत ही आवक है। छोटे व्यापारी किसान से खरीद कर माल ला नहीं पा रहे, उन्हें पुलिस परेशान करती है।

विनय गुप्ता आगे बताते हैं, अधिकतर फ्लोर मिलें बंद होने से मंडी में गेहूं की मांग भी कम है, इससे रेट भी थोड़ा कम है। लॉकडाउन के चलते मैदा की खपत करने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां, होटल और दुकानें बंद चल रही हैं, बाजार में मैदे की खपत कम होने से गेहूं की मांग भी नहीं है, दूसरे यह भी कि इन आटा मिलों को चलाने वाले दिहाडी मजदूर भी गाँवों को वापस चले गए हैं, वो भी नहीं आ पा रहे। बिस्किट बनाने वाली कंपनियां, होटलों आदि के बंद होने से मैदे की मांग कम आ रही, इसलिए मिलें नहीं चल रही हैं। इसका नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है।

सीतापुर में रहने वाले मिल मालिक उमेश अग्रवाल कहते है, सरकार ने लॉकडाउन के समय कृषि उत्पादों को मंडियों में ले जाने पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन पुलिस की दहशत और झंझट से बचने के लिए ये छोटे व्यापारी गांवों में किसानों का माल ही नहीं खरीद रहे हैं। धंधा बिल्कुल मंदा चल रहा है, बंदी की वजह से माल कोई गाड़ी वाला ले जाने को तैयार ही नहीं होता।

जब से लॉकडाउन शुरु हुआ है खरीदारी बंद है, बाराबंकी जिले के देवरा गाँव में रहने वाले छोटे व्यापारी मोहित बाजपेई अपनी समस्या रखते हैं। शाहजहांपुर की गल्ला मंडी के कोषाध्यक्ष कुलदीप गुप्ता बताते हैं, अब सब कुछ बंद चल रहा है, तो बाजार में मंदी आ गई है। हम यहां से मालगाडप़र गेहूं लादकर दूसरे राज्यों को गेहूं भेजते थे, लेकिन कहीं से कोई डिमांड ही नहीं आ रही। 
 

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