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जौ

जौ की उन्नत किस्में

जौ को समशीतोष्ण जलवायु चाहिए। यह समुद्रतल से 14,000 फुट की ऊँचाई तक पैदा होता है। यह गेहूँ के मुकाबले अधिक सहनशील पौधा है। इसे विभिन्न प्रकार की भूमि में बोया जा सकता है, पर मध्यम, दोमट भूमि अधिक उपयुक्त है। खेत समतल और जलनिकास योग्य होना चाहिए। प्रति एकड़ इसे 40 पाउंड नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, जो हरी खाद देने से पूर्ण हो जाती है। अन्यथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा कार्बनिक खाद – गोवर की खाद, कंपोस्ट तथा खली – और आधी अकार्बनिक खाद – ऐमोनियम सल्फेट और सोडियम नाइट्रेट – के रूप में क्रमशः: बोने के एक मास पूर्व और प्रथम सिंचाई पर देनी चाहिए। असिंचित भूमि में खाद की मात्रा कम दी जाती है। आवश्यकतानुसार फॉस्फोरस भी दिया जा सकता है।

कृषि कार्य

किस्में

सिंचित अवस्था

असिंचित अवस्था

उन्नत प्रभेद:

ज्योति, रत्ना

रत्ना

बुआई:

नवम्बर से दिसम्बर

नवम्बर से दिसम्बर, अगर खेत में नमी हो।

बीज दर:

100 कि./हें.

100 कि./हें.

उर्वरक:

40:20:20 कि.ग्रा. एन.पी.के. प्रति हेक्टेयर (70 कि.ग्रा. यूरिया 44 कि.ग्रा. डी.ए.पी. तथा 34 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ़ पोटाश/हें.) नाइट्रोजन की आधी मात्रा तथा फ़ॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुआई के समय दे। नाइट्रोजन की बची मात्रा प्रथम सिंचाई के समय दें।

20:20 कि.ग्रा. एन.पी./हें. (36 कि.ग्रा. यूरिया तथा 44 कि.ग्रा. डी.ए.पी. बोने के समय दें) ।

सिंचाई:

प्रथम सिंचाई बोने के 30-35 दिनों बाद तथा दूसरी 60 दिनों के बाद ।

उपज:

30-35 क्विं./हें.

12-18 क्विं./हें.

स्त्रोत एवं सामग्रीदाता: कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार

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