पशुपालन पार्ट 4

पशु आहार

साइलेज [Silagel]:- हरे चारे को प्राकृतिक रूप से परिरक्षित करने की क्रिया को साईलेज कहते है।

हे [Hay]:- घास को इस प्रकार से सुखाया जाता है कि इसमें नमी की मात्रा कम हो जाए अथति हरे चारे को सूखा कर हरी अवस्था में रखने को हे कहते है। |

राशन:- भोज्य पदार्थों की वह मात्रा जो पशुओं को सामान्यत 24 घण्टे की अवधि में खिलाई जाती है, राशन कहलाती है।

सन्तुलित आहार:- सन्तुलित आहार वह खुराक है। जिसमें वे सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में व अनुपात में विद्यमान होते है जिनकी आवश्यकता पशुओं को जीवन निर्वाह व उत्पादन के लिये आवश्यक होती है।

जीवन निर्वाह आहार:- यह आहार की वह मात्रा है जो पशुओं को स्वस्थ व यथावत बनाये रखने के लिए दी जाती है।

उत्पादन आहार:- यह आहार की मात्रा है जो पशु को जीवन निर्वाह के अतिरिक्त उत्पादन कार्य जैसे दूध, मांस, अण्डा, ऊन व प्रजनन के लिए दी जाती है।

आहार के मुख्य कार्यः –
1 शरीर को शक्ति व उर्जा प्रदान करना ।
2 उत्तकों का निर्माण करना
3 कोशिकाओं का निर्माण करना
4 विकास व भार वृद्धि के लिये |
5 उत्पादन के लिये ।
6 प्रजनन व भ्रूण वृद्धि के लिये

आहार के आवश्यक तत्व :

  1. जल:- सामान्यत: पशु शरीर में 60-70 प्रतिशत जल होता है।
  2. कार्बोहाइड्रेटः- शर्करा व स्टार्च का बना होता है तथा | उर्जा प्रदान करता है। [4 calory/unit]
  3. प्रोटीनः- यह शरीर का 5 वें हिस्सा होता है।
  4. वसा: – यह शरीर को सबसे ज्यादा उर्जा प्रदान करती है। (9Calory/unit)
  5. विटामिन:- यह अत्यन्त सुक्ष्म मात्रा में आवश्यक होते है। पशुओं को 12 विटामिनों की आवश्यकता होती है। इसमें मुख्यता A, D, E, K (Fat soluble] एवं B, C (Water soluble] हैं।
  6. खनिज तत्वः- पशुओं को 18 खनिज तत्वों की आवश्यकता होती है।

अच्छे आहार के गुणः

  • आहार सन्तुलित होना चाहिये।
  • आहार सुगमता से पचने वाला होना चाहिये।
  • आहार में समुचित मात्रा में रेशेदार पदार्थ होने चाहिये।
  • आहार में समुचित मात्रा में जल होना चाहिये।
  • आहार रेचक होना चाहिये।

मुख्य बिन्दु:-

  • पशु उत्पादन की लागत व्यय का 60-70 प्रतिशत भाग आहार पर व्यय होता है।
  • सिंचित क्षेत्रों में हरे चारे की फसलें उगाकर एक हैक्टेयर क्षेत्र में 8- 10 गायें रखी जा सकती हैं।
  • आवश्यकता से अधिक हरे चारे को ‘हे’ या ‘साइलेज’ के रूप में परिरक्षण करना चाहिए।
  • जिन पशुओं का पाचन तन्त्र (आमाशय) चार भागों में विभक्त होता है उन्हें जुगाली करने वाले पशु कहते है। जैसे गाय, मैस, भेंड़, बकरी व उँट ।
  • दूध उत्पादन के लिये निश्चित समय पर नियमित रूप से दूध दुहना, सम्पूर्ण दूध निकालना एवं तेजी से दूध निकालना आवश्यक है।

साइलेज

हरे चारे को उचित हरी अवस्था में काटकर हवा रहित स्थान में संग्रहित करने की क्रिया को साइलेज बनाना कहते हैं।

सिद्धान्तः– हरे चारे के पाष्टिक तत्वों को कायम रखते हुए हरी अवस्था में संग्रहित रखना साइलेज कहलाता है। हरे चारे को सड़ाने के लिये हवा का होना आवश्यक है। जब हरे चारे को हवारहित थानों में रखा जाता है तो उसमें कई प्रकार के अम्ल व CO, गैस आदि पैदा हो जाती है। यही अम्ल व गैस हरे चारे को सुरक्षित रखते है। अतः साइलेज एक किण्विकृत पदार्थ है।

साइलेज बनाने का स्थान:- जिस हवा बन्द सुरक्षित स्थान पर साइलेज बनाया जाता है उसे साइलो कहते हैं।

ये कई प्रकार के होते है:-

  1. गड्डे नुमा
  2. खाईनुमा
  3. बंकरनुमा
  4. टॉवरनुमा |

→ भारत में मुख्यतः गड्डेनुमा साइलो प्रचलित है।

साइलेज के गुणः

  • 1 यह एक मृदु दस्तावर चारा है।
  • 2 अच्छे साइलेज में एक विशिष्ट प्रकार की गन्ध हल्का खट्टापन
  • व पीला हरा रंग होता है।
  • 3 सबसे अच्छा साइलेज मक्का व ज्वार का बनता है।
  • 4 साइलेज में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढाने के लिए सीरा या गुड
  • का पानी मिला देते है।
  • 5 साइलेज बनाने के लिए फसलों को उस अवस्था में काटा जाता है जब उसमें उपयुक्त नमी व अधिकतम पोषक तत्व होते है। यह Milky Stage कहलाती है।
  • 6 एक Cubic feet साइलेज का भार 12 16 किलो होता है।
  • 7 साइलेज 12 सप्ताह (3 माह) में बनकर तैयार हो जाता है।
  • 8 साइलेज में 60 प्रतिशत शुष्क पदार्थ होते है।
  • 9 साइलेज में 30-40 प्रतिशत नमी होती है।

हे

  • वह संग्रहित चारा है जो चारे को पकने की अवस्था के पूर्व काटकर सुखाकर संग्रहित किया जाता है।
  • अच्छी हे के लिए फसल को फूल आने की अवस्था पर काटना चाहिये ।
  • यह पत्तेदार होता है एवं इसका रंग हरापन लिये होता है।
  • इसमें शुष्क पदार्थों की मात्रा 80-85 प्रतिशत होती है।
  • हे में 15 प्रतिशत नमी होती है।
  • सबसे बढ़िया हे बरसीम, रिजका, सोयाबीन आदि का बनता है।

पशुओं के लिये आहार निर्धारण

ग्याभिन गाय का आहार:–

गर्भकालअतिरिक्त दाना
1-6 माह 1 5 किलो प्रति दिन
6-8 माह2 किलो प्रति दिन
  • इसके अतिरिक्त ग्याभिन गाय को 10 किलो हरा चारा प्रति दिन खिलायें ।

बछडों के लिये आहारः–

बछड़ों को आहार निग्न सारणी अनुसार देना चाहिये:

आयुकोलस्ट्रमदूधदाना मिश्रण
1-4 दिनपशु के भार का 1/10 भाग खीस
5-14 दिनपशु के भार का 1/10 माग दूध
15-28 दिन4 लीटर100 ग्राम दाना
29-42 दिन3 लीटर250 ग्राम दाना
43-60 दिन2.5 लीटर500 ग्राम दाना
61-90 दिन2 लीटर750 ग्राम दाना
91-120 दिन1 लीटर1 किलो दाना

दुधारू पशुओं का आहारः –

  • 5 किलो तक दूध देने वाले पशुओं को भरपेट हरा चारा व 2 किलो दाना मिश्रण देना चाहिये।
  • गाय को प्रति 3 लीटर पर व भैसों को प्रति 2.5 लीटर दूध पर 1 किलो अतिरिक्त दाना मिश्रण देना चाहिये।

बैलो का आहार:

कार्यदाना मिश्रण
हल्का कार्य1-1.5 किलो दाना मिश्रण प्रति दिन
मध्यम कार्य2-2.5 किलो दाना मिश्रण प्रति दिन
भारी कार्य3-4 किलो दाना मिश्रण प्रति दिन
  • इसके अतिरिक्त बैलों को पर्याप्त हरा चारा देना चाहिये। |

भेड़ व बकरियों का आहार:

  • दूध देने वाली बकरियों को प्रति 1 लीटर दूध पर 300 ग्राम दाना देना चाहिये।
  • प्रजनन में प्रयुक्त बकरे को 500 ग्राम अतिरिक्त दाना प्रतिदिन देना चाहिये।
  • इसके अतिरिक्त बकरियों को 5-10 किलो हरा चारा प्रतिदिन देना चाहिये।

प्रजनन में प्रयुक्त होने वाले बैलो का आहार:

  • 10 किलो हरा चारा प्रतिदिन व 2-3 किलो दाना मिश्रण प्रतिदिन देना चाहिये ।
  1. → भारत में सबसे अधिक चावल का पुवाल पैदा होता है।
  2. → राजस्थान में सबसे अधिक गेहूं का भूसा पैदा होता है।
  3. → पशुओं के लिए सबसे प्रमुख हरे चारे रिजका व बरसीम है,
  4. → पशुओं के लिए सूखे हरे चारे गेंहू, जौ, रिजका, चावल का भूसा आदि है।

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