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बागवानी फसलों का भंडारण

भूमिका

भंडारण बागवानी उत्पादों की मूल्य श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए विपणन के दृष्टिकोण से भंडारण पहलुओं की गतिशीलता को जानना जरूरी है।

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नियंत्रित वातावरण

जब हम ताजा उपज के भंडारण के बारे में बात करते हैं, तो हम स्वतः इसका अर्थ नियंत्रित वातावरण में उन्हें रखना समझ लेते हैं। नियंत्रित वातावरण में ताजा उपज का भंडारण मांग के अनुसार आपूर्ति में उतार-चढ़ाव को रोकने में एक लंबा रास्ता तय करता है, जिससे बाजार की कीमत में काफी हद तक, स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, कई विकासशील देशों में एक नियंत्रित वातावरण में भंडारण अक्सर उच्च लागत, ढांचागत विकास और रखरखाव तथा प्रबंधकीय कौशल के अभाव की कमी आदि की वजह से बाधित होता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए, भारत सरकार की कई योजनाओं में ताजा उपज के कोल्डस्टोरेज को बढ़ावा देने के लिए अनुदान की पर्याप्त राशि प्रदान की जा रही है।

कृषि विपणन में सुधारों की शुरूआत के साथ, भारत के कई राज्यों में सरकारी-निजी भागीदारी में कोल्ड स्टोरेज सहित बुनियादी ढांचे के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए व्यापार की अनेक पुरानी बाधाओं को हटा दिया गया है।

एक फसल के भंडारण क्षमता का उपयोग कैसे करें?

यह बात पर अधिक बल देने कि आवश्यकता नहीं है कि जल्दी खराब होने वाली ताजा उपज को प्रशीतन के बिना संग्रहित नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर, परावेशिक स्थिति के अंतर्गत भंडारण द्वारा सबसे ज्यादा टिकाऊ ताजा उपज के के जीवन का विस्तार करने की सुविधा भी सीमित है।

अस्तित्व के अंग

आयरिश आलू, रतालू, बीट, गाजर और प्याज जैसी फसलों के खाद्य भागों की निद्रा की अवधि को केवल कोल्ड स्टोरेज के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है। इसे फसल के भंडारण की क्षमता कहा जाता है। ऐसी फसलों के खाद्य भागों में अस्तित्व के अंगों में फसल के बाद निद्रा की एक निश्चित अवधि होती है और उस अवधि के बाद उनमें फिर से विकास शुरू होने लगता है तथा इसकी वजह से उनके खाद्य मूल्य में गिरावट आती है। यह एक ही फसल की विभिन्न किस्मों की भंडारण क्षमता में भिन्नता की पहचान करना महत्वपूर्ण है। आमतौर पर अनुभवी स्थानीय उत्पादक और बीज आपूर्तिकर्ता इस विषय के बारे में जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

खाद्य प्रजनन भाग

ये काफी हद तक फल या फलीदार पौधों (मटर और सेम) के बीज तक ही सीमित होते हैं। उनकी ताजा हालत में, केवल थोड़े प्रशीतन से इन उत्पादों के संक्षिप्त भंडारण जीवन को बढ़ाया जा सकता है। उन्हें सुखाया भी जा सकता है, और तब इन्हें दाल कहा जाता है। दलहन को सूखा रखने पर इन्हें लंबे साय तक भंडारित किया जा सकता है और वे ताजा उपज को प्रभावित करने जैसी भंडारण की समस्या उत्पन्न नहीं करते।

ताजा फल और सब्जियां

इनमें हरी पत्तेदार सब्जियां, मांसल फल और फूलों के संशोधित भाग (जैसे फूलगोभी, अनानास) शामिल हैं। पारिवेशिक स्थिति के अंतर्गत इनमें बहुत सीमित भंडारण क्षमता है। अपनी तेज श्वसन दर के कारण तेजी से गर्मी के बढ़ने और उनकी उच्च नमी की मात्रा की कमी आने से वे जल्दी से खराब हो जाते हैं, क्योंकि संरक्षण के पारंपरिक तरीकों में उन्हें धूप में सुखाना या (चीनी) के साथ उनका संरक्षण और (नमकीन या सिरका के साथ) अचार बनाना जैसी साधारण घरेलू कार्रवाइयां की जाती हैं। अधिकांश ताजे फलों और सब्जियों में सबसे अच्छी पर्यावरणीय परिस्थितियों में भई केवल कुछ ही दिनों का भंडारण जीवन होता है।

भंडारण जीवन को प्रभावित करने वाले कारक

सभी प्रकार की ताजा उपज की कटाई के बाद के जीवन की प्राकृतिक सीमा तापमान, पानी की कमी, यांत्रिक क्षति जैसी विभिन्न जैविक और पर्यावरण की स्थितियों से गंभीर रूप से प्रभावित होती है।

तापमान-

तापमान में वृद्धि सभी खाद्य भंडारों और पानी की मात्रा के समाप्त होने की वजह से उनके प्राकृतिक रूप से नष्ट होने की दर में वृद्धि का कारण बनता है। उपज का ठंडा करना नष्ट होने की दर को धीमा करके इनके जीवन का विस्तार करता है।

पानी की कमी-

उच्च तापमान और चोटें संग्रहित उपज में प्राकृतिक कारणों से होने वाली पानी की कमी को और अधिक बढ़ा सकते हैं। उपज के द्वारा सहे जा सकने वाले सबसे कम तापमान पर केवल अच्छी(जो क्षतिग्रस्त न हो)फसल का भंडारण कर फसल द्वारा अधिकतम जीवन प्राप्त किया जा सकता है।

यांत्रिक क्षति-

कटाई के दौरान और बाद में संभालने के समय हुए नुकसान से उपज के नष्ट होने की दर बढ़ जाती है और यह क्षय जीवों के हमलों के लिए उत्तरदायी हो जाता है। बैक्टीरियल क्षय के कारण जड़ की फसलों के लिए यांत्रिक क्षति भारी नुकसान का कारण बनती है और भंडारण से पहले जड़ों या कंद के उपचार से इसका निवारण किया जाना चाहिए।

भंडारण में क्षय-

ज्यादातर यांत्रिक चोटों के संक्रमण के कारण भंडारण के दौरान ताजा उपज का क्षय होता है। इसके अलावा, कई फलों और सब्जियों के प्राकृतिक छेदों के माध्यम से या यहाँ तक कि त्वचा के बरकरार रहने पर भी उसके माध्यम से घुसकर क्षयकारक जीवाणु हमला कर देते हैं। ये संक्रमण अक्सर, खेत में पौधे के विकास के दौरान आरंभ हुए हो सकते हैं लेकिन फसल के तैयार होने तक निष्क्रिय पड़े रह सकते हैं और केवल भंडारण तथा पकने के समय दिखाई देते हैं ।

भंडारण संरचनाएं

हवादार भंडार-

जड़ों और कंद, कद्दू, प्याज और कडी सफेद गोभी जैसे, लंबे समय तक भंडारण क्षमता वाली उपज के भंडारण के लिए प्राकृतिक रूप से हवादार संरचनाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रत्येक इच्छित स्थान के लिए इस तरह के गोदामों को विशेष रूप से बनाया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार की इमारत का इस्तेमाल किया जा सकता है बशर्ते कि यह संरचना और इसकी सामग्री के माध्यम से हवा के मुक्त संचलन की अनुमति देता है।

निम्नलिखित का अनिवार्य रूप से पालन किया जाना चाहिए-

  • इमारत की छत और दीवारों को ढकने वाली सामग्री को सूरज की गर्मी से इन्सुलेशन प्रदान किया जाना चाहिए, झाड़ियों के ढांचे पर रखी घास फूस बहुत कारगर हो सकती है, खासकर तब, जब इसे वाष्पीकरणीय ठंडक प्रदान करने के लिए गीला किया जाए,
  • अगर लागत अनुमति देता है, तो दोहरी- परत वाली दीवारें बेहतर इन्सुलेशन प्रदान करेंगी,
  • मानव निर्मित सामग्री की सतहों पर लगाये जाने वाले सफेद रंग से सूरज की गर्मी को प्रतिबिंबित करने में मदद मिलेगी,
  • अगर वे हवा का प्रवाह के साथ हस्तक्षेप नहीं करते तो संरचना को पेड़ों की छाया में बनाया जाना चाहिए, झाड़ी में लगने वाली आग और तूफान के दौरान पेड़ के गिरने से सावधान रहें,
  • हवा के अच्छी तरह प्रवाहित होने के लिए फर्श से नीचे और दीवारों और छत के बीच वेंटिलेशन के लिए रिक्त स्थान प्रदान करें
  • इमारत एक ऐसे स्थान पर स्थित होनी चाहिए जहां भंडारण अवधि में रात के कम तापमान की आवश्यकता होती है,
  • यह वेंटिलेशन के लिए प्रवाहित हवा का अधिकतम उपयोग करने के लिए उन्मुख होना चाहिए,
  • अगर गोदाम रात के ठंड तापमान के अधीन है, तो घूमने वाली जाली लगाएं और दिन में गोदाम में गर्म हवा के प्रवाह को सीमित करने के लिए उन्हें समायोजित करें।

ये एक हवादार गोदाम की बुनियादी आवश्यकताएं हैं। मिलावट के विभिन्न स्तरों का उपयोग कर आर्थिक रूप से स्वीकार्य अंतर युक्त थर्मोस्टैट द्वारा नियंत्रित पंखें की मदद से वेंटिलेशन के साथ इस तरह के गोदामों का निर्माण किया जा सकता है। यूरोप में, जहां बाहरी सर्दियों की स्थिति भंडारण तापमान का सही नियंत्रण संभव करती है आयरिश आलू और प्याज के थोक भंडारण के लिए आम तौर पर इस प्रकार के गोदाम का उपयोग किया जाता है।

गर्म मौसम में ऊंचाई पर बीज आलू का भंडारण करने के लिए सरल, खुली हुई, स्वाभाविक रूप से हवादार संरचनाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। भोजन के आलू के लिए इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है क्योंकि कुछ घंटों से अधिक समय तक प्रकाश के संपर्क में आने पर इनमें हरे रंग के साथ एक कड़वा स्वाद आ जाता है या ये विषाक्त हो सकते हैं।

क्लैंप सरल, सस्ती संरचनाएं हैं, यूरोप और लैटिन अमेरिका में जड़ फसलों, विशेष रूप से आलू के भंडारण के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है।

गर्म मौसम में आलू को 1 से 3 मीटर चौड़े पुआल के एक बिस्तर पर रख दिया गया है, लेकिन ये 1.5 मीटर से अधिक बड़े नहीं होने चाहिए। नीचे की ओर वेंटिलेशन के लिए एक नाली रखी जानी चाहिए।

खुले आलू 20 सेमी के जमे हुए भूसे से ढक दिया जाता है, जिसे बाद में बिना संघनन के 30 सेमी की गहराई में लागू किया जाता है।मिट्टी में रखा जा सकता है, जो विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के लिए कलैम्प प्रणाली को संशोधित किया जा सकता है। गर्म मौसम में, वेंटिलेशन देने के लिए मिट्टी की बजाय अतिरिक्त भूसे के आवरण का इस्तेमाल किया जा सकता है। (आलू भंडारण के सिद्धांतों से पुनरुत्पादित, अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र, लीमा, 1981)

भंडारण के अन्य साधारण तरीकेः वायुरोधक संकीर्ण होते हैं, लगभग 1 मीटर चौड़े और 2 मीटर ऊंचे, किसी भी सुविधाजनक लंबाई के, लकड़ी के आधार पर तार की जाली की टोकरी जैसी संरचनाओं का सूखे प्याज के छोटी अवधि के भंडारण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। प्याज को उपर से बदले में भूसे की एक 30 सेमी परत से छका जा सकता है, जिसे बाद में तार की जाली से बंधे एक पॉलिथीन शीट के नीचे रखा जा सकता है। अधिकतम हवा प्रवाह और सुखने के लिए इसे हवा के प्रवाहित होने के सही कोण पर बनाया जाता है। प्याज को सुतली की बुनी चोटी में भी लटकाया जा सकता है और उन्हें कई महीनों रखने के लिए एक शांत सूखी जगह में लटकाया जा सकता है।

प्रशीतित और नियंत्रित वातावरण भंडारणः बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक परिचालन के लिए, उत्पादन क्षेत्रों से प्रशीतित भंडारण शहरी बाजारों और खुदरा विक्रेताओं के लिए नियमित खेप ले जाने के लिए एक कोल्ड चेन का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक बेहद जटिल संचालन है, जिसके लिए विशेषज्ञ संगठन और प्रबंधन की आवश्यकता होती है। आलू और प्याज जैसी मौसमी फसलों के लंबी अवधि के भंडारण के लिए भी कोल्ड स्टोरेज का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का एक मिश्रण सहित एक नियंत्रित वातावरण के साथ प्रशीतन के संयोजन से सेब जैसे कुछ फलों के भंडारण जीवन को बढ़ाया जा सकता है।

ये उच्च रखरखाव और परिचालन लागत के महंगे संचालन हैं, और कुशल और अनुभवी प्रबंधन की मांग करते हैं। विकासशील देशों में छोटे पैमाने पर उत्पादन करने के लिए इनका अपेक्षाकृत कम उपयोग किया जाता है।

नियंत्रित वातावरण (सी.ए.) भंडारण

नियंत्रित या संशोधित वातावरण भंडारण का एक पूरक के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए और न उचित तापमान और सापेक्ष आर्द्रता प्रबंधन के एक विकल्प के रूप में।

भंडारण वातावरण में हवा की संरचना को संशोधित करने के कुछ सरल तरीके नीचे सूचीबद्ध हैं। गोदाम में आने वाली या कमरे के भीतर फिर से परिचालित की जाने वाली हवा का एक वायु निगरानी और नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से गुजरना आवश्यक है।

आक्सीजन गैस नियंत्रण कम करने के लिए

■ नाइट्रोजन के साथ परिष्करण

■ एक बाष्पीकरण के माध्यम से तरल नाइट्रोजन से

■एक झिल्ली प्रणाली नाइट्रोजन जनरेटर से

■एक आणविक चलनी सिस्टम नाइट्रोजन जनरेटर से

कार्बन डाइऑक्साइड नियंत्रण बढ़ाने के लिए –

■ सूखी बर्फ

■ दबाव युक्त गैस सिलेंडर कम करने के लिए

■ आण्विक चलनी स्क्रबर

■ सक्रिय चारकोल स्क्रबर

■ सोडियम हाइड्रॉक्साइड स्क्रबर

■  हाइड्रेटेड चूना (100 किलो फल को हवादार करने के लिए हवा का उपचार करने में 0.6 किलो हाइड्रेटेड चूने का उपयोग करें। हवा को सी. ए. गोदाम के अंदर या बाहर स्थित एक बॉक्स के माध्यम से पारित करने के लिए निर्देशित किया जा सकता है)।

ईथीलीन नियंत्रण- कम करने के लिए

पोटेशियम परमैंगनेट

सक्रिय चारकोल

विस्तार गतिविधियाँ

केन्द्र सरकार और राज्य सरकार दोनों की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में उन्हें सहायता देकर निजी उद्यमियों द्वारा भंडारण बुनियादी ढांचे (शुष्क और ठंडा दोनों) के निर्माण को बढ़ावा देना। आगे और पीछे की दोनों कड़ियों को भंडारण सुविधाओं के साथ लाकर एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला के एक भाग के रूप में भंडारण की सुविधा को बढ़ावा देना।

किसानों को स्थानीय उपज की आदर्श भंडारण की स्थिति के बारे में जागरूक बनाना, ताकि वे भंडारण प्रदाताओं (निजी या सरकार) से उसकी मांग कर सकें।

स्रोत: राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (मैनेज), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय,भारत सरकार का संगठनSource

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