//बीज उत्पादन कर बदली तकदीर, कभी थी पांच एकड़ जमीन, आज 115 एकड़ पर करते हैं खेती

बीज उत्पादन कर बदली तकदीर, कभी थी पांच एकड़ जमीन, आज 115 एकड़ पर करते हैं खेती

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला

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कभी उनके पास पांच एकड़ जमीन थी और वह भी बंजर थी। इस जमीन को मेहनत कर कृषि योग्य बनाया और इस पर परंपरागत ढंग से खेती करनी शुरू कर दी। खेती से गुजारा नहीं होता था तो साथ-साथ पशु पालने लगे। मगर उनका नई बीजों के प्रति शौक ने उनकी जिंदगी बदल ली। आज उनके पास खुद की 32 एकड़ जमीन है और वह 115 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। 

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वह बेशक आठवीं पास है, लेकिन उनका उठना-बैठना बड़े-बड़े कृषि वैज्ञानिकों के साथ है। यह कहना है कि पानीपत के उरलाना खुर्द निवासी किसान प्रीतम सिंह का। प्रीतम को कृषि क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों के कारण एचएयू की तरफ से किसान रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

प्रीतम सिंह ने बताया कि देश की आजादी के समय वह सरकार की तरफ से उन्हें उत्तर प्रदेश बरेली जिले में कुछ जमीन दी गई। मगर वहां उनके साथ धोखाधड़ी हुई। वर्ष 1980 में वह परिवार सहित पानीपत के गांव उरलाना खुर्द में आ गए। यहां उन्होंने पांच एकड़ जमीन ली, जो कि बंजर थी। धीरे-धीरे उन्होंने उसे खेती योग्य बनाया। घर चलाने के लिए उन्हें पशुपालन शुरू किया। 

एक बार एचएयू के एक वैज्ञानिक ने उन्हें अलग-अलग किस्मों के बीज दिए। उन्होंने उस बीज को मल्टीप्लाई कर बेचना शुरू कर दिया। इसके बाद से उसे जब कभी कोई नई किस्म मिलती तो वह उसकी मल्टीप्लाई करता। इसके बाद उसने नई दिल्ली स्थित पूसा इंस्टीट्यूट और केवीके के लिए बीज उत्पादन करना शुरू कर दिया। उसने पद्मश्री अवॉर्डी डॉ. वीपी सिंह के साथ भी काफी काम किया। 

आज के समय उसके पास कृषि की सभी आधुनिक यंत्र हैं। प्रीतम सिंह के मुताबिक कृषि आज के समय में घाटे का सौदा नहीं है। बस किसानों को वही फसल उगानी चाहिए, जिसे वह अच्छे दामों में बेच सके। अगर किसान इस मंत्र पर चलेंगे तो खेती कभी घाटे का सौदा नहीं बनेगी

 


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