बजट में दलहन-तिलहन की सरकारी खरीद योजना में भारी कटौती, किसानों से फसल खरीद पर होगा असर

केन्द्रीय बजट 2020 पीएम आशा योजना के लिए आवंटन

केंद्र सरकार एक तरफ तो किसानों को दलहन एवं तिलहन फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात आकर रही है वही इस वर्ष दलहन तिलहन खरीद से सम्बन्धित योजना (पीएम आशा योजना) के बजट में भारी कटौती की गई है | अभी हाल ही में 10 फरवरी को हुए संयुक्त राष्ट्र विश्व दलहन दिवस समारोह का आज नई दिल्ली में उद्घाटन करते हुए, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत में दलहनों का आवश्यकता से अधिक उत्पादन करना है |

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किसानों से दलहन, तिलहन तथा गरी (copra) की सरकारी खरीदी करने वाली योजना के लिए इस बार की बजट में भारी कटौती की गई है | पिछले वर्ष इस योजना के लिए 1500 करोड़ रुपये जारी किये गए थे  वहीँ  इस वर्ष केन्द्रीय बजट पेश करते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1,000 करोड़ रूपये की कटौती करते हुए मात्र 500 करोड़ रूपये जारी किये हैं |

फसल खरीदी करने के लिए चल रही योजनायें

किसानों को फसल का उचित तथा लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान की शुरुआत की थी | यह योजना को पीएम-आशा योजना के नाम से जाना जाता है | योजना के अंतर्गत तीन प्रकार की उप योजना के तहत संचालित किया जाता है |

  1. मूल्य समर्थन योजना
  2. मूल्य न्यूनतम भुगतान योजना
  3. निजी खरीदी एवं स्टाकिस्ट योजना

पीएम-आशा योजना की शुरुआत वर्ष 2018 में केन्द्रीय बजट में की गई थी | इस योजना के उप योजना मूल्य समर्थन योजना के तहत किसानों को दलहन तिलहन तथा गरी (copra) की भौतिक खरीदी राज्य सरकारों के सक्रिय सहयोग से केन्द्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा करने की थी | यह खरीदी नैफेड के अलवा खाध निगम (FCI) भी राज्यों / जिलों में PSS परिचालन के द्वारा किया जाना है |

इसके साथ ही मूल्य न्यूनतम भुगतान योजना के अंतर्गत तिलहन फसल को कवर किया जाता है जिसका केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करता है | इस योजना के अन्तर्गत फसलों की कोई भौतिक खरीदी नहीं की जाती है क्योंकि अधिसूचित बाजार में बिक्री करने पर MSP और बिक्री / औसत मूल्य में अंतर का भुगतान किसानों को कर दिया जाता है |

पीएम आशा योजना के तहत बजट आवंटन

इस योजना के शुरूआती वर्ष में केंद्र सरकार ने 1400 करोड़ रुपये जारी किये थे तथा इसे दलहन और तिलहन के किसानों के लिए एक वरदान के रूप में बताया गया था | इसके बाद के वर्ष 2019 के केन्द्रीय बजट में पीएम आशा योजना के लिए 1500 करोड़ रुपये जारी किये गए थे | बजट में कटौती का सीधा असर किसनों पर पड़ने वाला है | जिससे किसानों में दलहन, तिलहन तथा कोपरा के प्रति उदासीन माहौल रहेगा |

भारत पहले से ही दलहन तथा तिलहन के लिए विदेशी आयत पर निर्भर रहता है | देश में जरूरत के मुताबिक ना ही दलहन का उत्पादन हो रहा है और ना ही तिलहन का उत्पादन हो रहा है | देश में प्रति वर्ष लगभग 71 हजार करोड़ रूपये का खाध तेल का आयात होता है |अब आने वाले रबी मौसम में देखने को मिलेगा की दलहन तथा तिलहन की खरीदी पर इसका क्या असर पड़ता है |

वर्ष 2020-21 बजट में योजनाओं के तहत प्रस्तावित राशि का विविरण डाउनलोड करें

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