मित्रों हमारे जिंदगी मे लकड़ी का बहूत महत्व है, इसलिए आपके लिए एक बहुत ही पुराना और उम्दा भजन लेकर आया हूँ। आपको जरुर पसंद आएगा!!” जीते लकड़ी मरते लकड़ी, तू देख तमाशा लकड़ी काहमें फेसबुक पर भी पसंद करेंजीते लकड़ी मरते लकड़ी, तू देख तमाशा लकड़ी काजब मात गर्भRead More →

वैज्ञानिक वर्गीकरण जगत: Plantaeविभाग: Magnoliophytaवर्ग: Magnoliopsidaगण: Gentianalesकुल: Apocynaceaeउपकुल: Asclepiadoideaeप्रजाति: Calotropisजाति: C. gigantea द्विपद नाम_Calotropis gigantea_(L.) मुझे फेसबुक पर देखेंमदार (वानस्पतिक नाम:Calotropis gigantea) एक औषधीय पादप है। इसको मंदार’,आक, ‘अर्क’ और अकौआ भी कहते हैं। इसका वृक्ष छोटा और छत्तादार होता है। पत्ते बरगद के पत्तों समान मोटे होते हैं। हरेRead More →

* सर्व सुलभ है ये पौधा हर जगह देखने को मिल जाता है लेकिन इसके उपयोग की जानकारी कम लोगो को है हम आपको इसके प्रयोग की जानकारी दे रहे है। * आक का पौधा दो प्रकार का होता है एक सफ़ेद और नीला। * आक की जड को पानीRead More →

ईसबगोल एक औषधीय पौधा है। इसकी खेती सबसे अधिक भारत में की जाती है। राज्यों में – गुजरात पंजाब और उत्तर प्रदेश प्रमुख है जहां ईसबगोल एक नगद फसल के रूप में पैदा की जा रही है। ईसबगोल एक छोटा तना रहित शाकीय पौधा होता है इसके बीज का छिलका(भूसी)Read More →

चन्द्रशूर एक ऐसी रबी औषधीय फसल है, जो विभिन्न प्रकार की भूमियों में बहुत ही कम संसाधनों में व सीमित सिंचाई साधनों के साथ उगाई जा सकती है। चन्द्रशूर की प्रमुख विशेषताएं:- 1. चन्द्रशूर विभिन्न प्रकार की भूमियों में उगाया जा सकता है। 2. फसल की यदि 1-2 बार हीRead More →

बांसवाडा के किसानों को देशी तरीके से तैयार कीटनाशी और खाद समृद्ध बना रही है। इससे पैदावार के साथ जमीन की गुणवत्ता बढ़ रही है। रिटायर रेंजर चंद्रप्रकाश पूरी बात बताते हैं कि देशी खाद फसलों में जैविक गुण को बढ़ा देती है। इससे गेहूँ, मक्का और अन्य फसलों केRead More →

गुलदाउदी मूलत: तीन प्रकार की होती है- पहली बड़ी, दूसरी छोटी और तीसरी मिनी। बड़ी प्रजाति में करीब 13 आकार के फूल आते हैं, जैसे स्पाइडर, ट्यूबलर, रेफ्लेक्स, इनकर्व, डेकोरेटिव आदि। छोटी में करीब छह-सात आकार के फूल आते हैं, जैसे एनीमोन, पॉम्पन, डेकोरेटिव, स्प्रे, कोरियन और नो पिंच नोRead More →

जब गेहूं के बीज को अच्छी उपजाऊ जमीन में बोया जाता है तो कुछ ही दिनों में वह अंकुरित होकर बढ़ने लगता है और उसमें पत्तियां निकलने लगती है। जब यह अंकुरण पांच-छह पत्तों का हो जाता है तो अंकुरित बीज का यह भाग गेहूं का ज्वारा कहलाता है। औषधीयRead More →