/Sheath Rot Disease of Rice | धान का शीथ रॉट। तना सड़न । शीथ रॉट

Sheath Rot Disease of Rice | धान का शीथ रॉट। तना सड़न । शीथ रॉट

किसान भाई यह रोग धान में बहुत बड़ी समस्या है जिसके कारण से हर वर्ष धान की पैदावार में कमी करता है और हमारे किसान भाई इस रोग की पहचान न कर पाने से रोग पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे  है।

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रोग का कारक  Sheath rot is caused by Sarocladium oryzae. (Fungal disease)

रोग का लक्षण या पहचान

Sheath Rot of Rice
  1. धान की पत्ती पर 1 से 3 सेंटीमीटर लंबे हरे धूसर रंग के धब्बे दिखाई पड़ते हैं जिनके किनारे कत्थई रंग के हो जाते हैं।
  2. खेत में पानी के नजदीक पत्तियों के शीथ पर छोटे काले अनियमित आकार के धब्बे बनते हैं।
  3. बालिया खाली अथवा आधी भरी रह जाती है और बालियों में आंशिक रूप से निकलना या  दाने ना बनना।

रोग का प्रबंधन

  1. गर्मी की गहरी जुताई करें ।
  2. नर्सरी या धान की फसल को छाया में ना लगाएं।
  3. बीज शोधन के बाद बुवाई करें ।
  4. संक्रमित पौधे के अवशेष को जलाएं अथवा उसको जमीन में दबा दें ।
  5. खेत में लगातार पानी रोक कर ना रखें ।
  6. खेत एक खेत से दूसरे खेत में काटकर सिंचाई ना करें।
  7. उवर्रक का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें।
  8. यह रोग का लक्षण देखने के पश्चात नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  9. रोपाई करते समय पौधों के बीच में पर्याप्त दूरी रखनी चाहिए।
  10. संक्रमित क्षेत्र में से पानी के आवागमन को अवरुद्ध कर देना चाहिए या रोक देना चाहिए।
  11.  खेत की मेड़ों और सिंचाई की नालियों को खरपतवार निकाल देनी चाहिए ताकि रोग कम हो।

 

रासायनिक नियंत्रण-

  1. नर्सरी में बुवाई से पूर्व बीज का उपचार बविस्टिन 10 ग्राम + 1 ग्राम स्ट्रेप्टोसायक्लीन की मात्रा को 10 लीटर पानी के घोल में मिलाकर 10 से 12 घंटे भीगा देनी चाहिए।
  2. रोग दिखाई देने पर प्रति हेक्टेयर मैनकोज़ेब 75% 1.5 किलोग्राम + कार्बेंडाजिम 50% 500 ग्राम मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देनी चाहिए।
  3. कार्बेंडाजिम 50% 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देनी चाहिए।
  4. हेसाकोनाज़ोल 5% इसी 1 लीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करनी चाहिए।
  5. प्रोपिकॉनाज़ोल 25% इसी 500ml प्रति हेक्टेयर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करनी चाहिए।
  6. वलीडमैसिटीन 3 प्रतिशत 600ml प्रति हेक्टेयर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देनी चाहिए।

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