पपीता से पपेन बनायें

भूमिका झारखंड की मिट्टी एवं जलवायु पपीता की खेती के लिए अत्यंत ही उपयुक्त है। पपीते का प्रयोग पके फलों को खाने एवं उनसे अनेक परिरक्षित पदार्थ जैसे – जैम, कैन्डी, नेक्टर, पेय पदार्थ आदि…

वर्षा जल प्रबंध द्वारा फलों की खेती

भूमिका नवोदित झारखंड प्रदेश छोटानागपुर एवं संथाल परगना के पठारी क्षेत्र में स्थित है। यहाँ पर कुल भौगोलिक क्षेत्रफल (80 लाख हेक्टेयर) का लगभग 28 प्रतिशत भाग वनों से ढका हुआ है। इस क्षेत्र में…

सरसों की खेती (Musterd)

दोस्तों आप सभी का इतना प्यार और साथ मिल रहा है उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद। आप सब मेरी सारी पोस्ट पढ़ते हैं इस बात से मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है।और मै ये ख़ुशी…

ई-पशुहाट पोर्टल

ई-पशुहाट पोर्टल का उद्देश्य बोवाइन जर्मप्लाज्म की उपलब्धता के बारे में जानकारी प्रदा करना है। इस पोर्टल को गोजातीय उत्पादकता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत प्रारंभ किया गया है। लक्ष्य और उद्देश्य पशुधन जर्मप्लाज्म और अतिरिक्त…

वर्षा आधारित खेती की उन्नत तकनीक

भूमिका झारखण्ड राज्य की स्थापना 15 नवम्बर 2000 में हुई। यह 22 जिलों में 79,70 लाख हेक्टेयर भूमि में फैला हुआ है। इस राज्य में सिंचाई की सुविधा खरीफ में 12%, रबी में 8% और…

80 एकड़ जमीन में बने तालाब से सालाना…

परिचय मछलीपालन ने समस्तीपुर सरायरंजन के शहजादापुर गाँव के लोगों की तकदीर बदल दी। यहां का रहन सहन भी बदल गया है। यहां पानी में डूबे खेत में कोई फसल नहीं होती थी। आज यह…

झारखण्ड की मिट्टी में पोषक तत्वों की समस्या…

खेती योग्य मिट्टी में पोषक तत्वों की समस्या झारखण्ड राज्य के कुल 80 लाख हेक्टेयर भूमि खेती योग्य है। इन मिट्टियों में फसल उत्पादन के लिए पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है। मिट्टी जाँच…