सिंचाई, जल निकासी और मत्स्य पालन के लिए…

परिचय अक्षीय प्रवाह और मिश्रित प्रवाह पंप (AFPs और MFPs) छोटे खेतों के लिए ऊर्जा-बचत की तकनीक हैं। इसका विकास वियतनाम और थाईलैंड में 1960 के दशक में हुआ था। आज, पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया…

अतिरिक्त आय एवं पोषण सुरक्षा हेतु वर्ष भर…

मशरूम एक पौष्टिक स्वस्थ आहार के रूप में मशरूम का प्रयोग विश्व भर में प्रचलित हैं। इसमें उच्च कोटि की प्रोटीन, प्रचुर मात्रा में खनिज लवण, खाद्य रेशा एवं विटामिन पाए जाते हैं। आवश्यक अमीनों…

जापानी पुदीना(मेन्था) की खेती

परिचय मेन्था की उत्पत्ति स्थान चीन माना जाता है। चीन से यह जापान ले जाया गया, वहां से यह संसार के विभिन्न देशों में पहुंचा। मेन्था भारत में जापान से लाया गया है। इसलिए इसे…

परवल की बढ़ती उपयोगिता

परिचय परवल, कद्दूवर्गीय महत्वपूर्ण सब्जी मानी जाती है। इसकी उपलब्धता फरवरी से प्रारंभ होकर दिसम्बर तक बाजार में होती है। निर्यात की दृष्टि से परवल एक महत्वपूर्ण सब्जी है। उत्तर प्रदेश एवं बिहार के मैदानी…

स्वच्छ दुग्ध उत्पादन: क्यों और कैसे

भूमिका गांवों के अधिकतर परिवारों में दुधारू पशु पाले जाते हैं। हालांकि दुधारू पशु पालना एक बात है और स्वच्छ दुग्ध उत्पादन अलग। स्वच्छ दुग्ध उत्पादन से हम दूध को जल्दी खराब होने से बचा…

घी में वनस्पती तेलों की मिलावट जांच करने…

परिचय घी सबसे महत्त्वपूर्ण एवं शक्तिवर्धक स्वदेशी दूध उत्पाद है। वैदिक काल से ही घी का भारतीय आहार में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है इसका विवरण वेदों में मिलता है। घी का उपयोग भारत के…

कालमेघ की खेती

भूमिका कालमेघ एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक तथा देशी पद्धति में प्रयोग होने वाला औषधीय पौधा है। इसको कल्पनाथ,करियातु हरा चिरायता तथा उड़िया में भुईनिम्बा भी कहते है। अधिकतर इसको वनों से एकत्र किया जाता है।…

कोलियस फोर्सखोली की खेती

परिचय कोलियस फोर्सकोली जिसे पाषाणभेद अथवा पत्थरचूर भी कहा जाता है, उस औषधीय पौधों में से है, वैज्ञानिक आधारों पर जिनकी औषधीय उपयोगिता हाल ही में स्थापित हुई है। भारतवर्ष के समस्त उष्ण कटिबन्धीय एवं…