पौधा लगाने की विधि: [1] पौधा गड्ढे में उतनी गहराई में लगाना चाहिए जितनी गहराई तक वह नर्सरी या गमले में या पोलीथीन की थैली में था। अधिक गहराई में लगाने से तने को हानि पहुँचती है और कम गहराई में लगाने से जड़े मिट्टी के बाहर जाती है, जिससेRead More →

1. शीशम के फायदेशीशम को आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता है। शीशम के पत्तों से निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ को कई रोगों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। इसके तेल कोदर्दनाशक, अवसादरोधी, सड़न रोकने वाले, कामोत्तेजक, जीवाणु रोधक, कीटनाशक और स्फूर्तिदायक आदि के तौर परRead More →

परिचय –शीशम (Shisham, Dalbergia Sissoo, The Blackwood, Rosewood) बहुपयोगी वृक्ष है। इसकी लकड़ी, पत्तियाँ,जड़ें सभी काम में आती हैं। इस की लकड़ी फर्नीचर एवं इमारती लकड़ी के लिये बहुत उपयुक्त होती है। पत्तियाँ पशुओं के लिए प्रोटीनयुक्त चारा होती हैं। जड़ें भूमि को अधिक उपजाऊ बनाती हैं। पत्तियाँ व शाखाएँRead More →

दूब या ‘दुर्वा’ (वैज्ञानिक नाम- ‘साइनोडान डेक्टीलान”) वर्ष भर पाई जाने वाली घास है, जो ज़मीन पर पसरते हुए या फैलते हुए बढती है। हिन्दू धर्म में इस घास को बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकाण्डों में इसका उपयोग बहुत किया जाता है। इसके नए पौधेRead More →

भरतपुरघर के आंगन में धार्मिक महत्व के लिए लगाई जाने वाली तुलसी की अब व्यवसाय के तौर पर भी खेती की जाने लगी है। डीग के खेरिया पुरोहित के किसानों ने यह प्रयोग किया है। यहाँ करीब 30 बीघा क्षेत्र में तुलसी की खेती हो रही है। इसके पत्तो सेRead More →

दोस्तों कई दिनों से मै वानस्पतिक नाम लिखने की कोशिश कर रहा था लेकिन लिख नही पा रहा था अंततः आज मै आप तक फसलों के वानस्पतिक नाम पहुंचा ही रहा हूँ। इसमें कोई त्रुटि रह गई हो तो जरुर बताना मै सुधार करने की कोशिश करूंगा। English – BotanicalRead More →

नीम भारतीय मूल का एक सदाबहार वृक्ष है। यह सदियों से समीपवर्ती देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यानमार (बर्मा), थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका आदि देशों में पाया जाता रहा है।यह भी पढ़ेंनीम के फायदे : • नीम के पेड़ पूरे दक्षिण एशिया में फैले हैं और हमारे जीवन से जुड़े हुए हैं।Read More →

नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है।यहाँ तक कि इसको भारत में ‘गांव का दवाखाना’ कहा जाता है। यह अपने औषधीय गुणों की वजह से आयुर्वेदिक मेडिसिन में पिछले चार हजार सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहाRead More →