30 बीघा में खेती कर बेचीं तुलसी माला, मिला अच्छा मुनाफा

भरतपुर

घर के आंगन में धार्मिक महत्व के लिए लगाई जाने वाली तुलसी की अब व्यवसाय के तौर पर भी खेती की जाने लगी है। डीग के खेरिया पुरोहित के किसानों ने यह प्रयोग किया है। यहाँ करीब 30 बीघा क्षेत्र में तुलसी की खेती हो रही है। इसके पत्तो से आयुर्वेदिक दवा बनती है और लकड़ी माला बनाने के काम आती है। इसलिए तुलसी की माला बनाने का काम कुटीर उद्योग का रूप लेने है।

तुलसी की खेती और माला बनाने का काम डीग, नदबई, कामां के अलावा गाँव बहताना, बहरावली, इकलेरा, शाहपुरा, कुचावटी, बहज, बैलारा, चैनपुरा, नदबई, नगला हरचंद में हो रहा है। करीब 30 बीघा में खेती हो रही है। इन गांवों में करीब तीन हजार महिलाएं माला बनाने का काम करती है। मालाएँ मथुरा, वृन्दावन, गोवर्धन, बरसाना, नन्दगाँव, गोकुल, अयोध्या, बनारस , इलाहबाद, हरिद्वार, जयपुर, आगरा, नाथद्वारा, कांकरोली, पुष्कर, अहमदाबाद, सोमनाथ, मुम्बई, जगन्नाथपुरी धाम में बिकती है। लूपिन संस्था ने महिलाओं को बेटरी चालित मशीन दी है। इससे विभिन्न आकर के दाने तैयार कर माला बनाई जाती है। लूपिन निदेशक सीताराम गुप्ता ने बताया है किइन मशीनों को IIT दिल्ली के छात्रों ने विकसित किया है। मशीन से बने दानों की पोलिश करने कइ आवश्यकता नहीं रहती है।

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पथरी-चर्मरोग होता है खत्म
आयुर्वेद चिकित्सक चन्द्रप्रकाश दीक्षित ने बताया कि तुलसी सर्वरोग संहारक है। तुलसी में विद्युत शक्ति होती है। तुलसी पथरी, रक्तदोष, पसलियों के दर्द, चर्मरोग, कफ एवं वायु रोगों में लाभदायक होती है। जुकाम, ह्रदय, श्वसन, दंत, चर्मरोग में उपयोगी है।

मुनाफा

खेडिया पुरोहित के किसान श्रीचंद लोधा ने बताया कि तुलसी शाखा, तना एवं जड़ों से माला बनती हैं। जो 30 से 200 रूपये किलो की दर से बिकती है जड़ों से बनी माला 250 से 300 रूपये की बिकती है। एक किलो तने से करीब 40 मालाएँ बनती हैं। ब्रेसलेट भी बनाए जाने लगे हैं। पते करीब 35 हजार रूपये क्विंटल और बीज 15 हजार रूपये प्रति क्विंटल बिकते हैं।

बुवाई

किसान सुदामा ने बताया कि तुलसी की बुवाई मई जून माह में की जाती है। एक-दो पानी देने के बाद तुलसी के पौधों में फूल आना शुरू हो जाते हैं और बाद में कटाई कर सुखाया जाता है, जिससे पत्ते झड़ जाते हैं। उन्हें छाया में सुखाया जाता है। इसी प्रकार तुलसी के बीजों को भी पौधों से झड़ा कर एकत्रित कर लिया जाता है। इसकी 22 किस्म है।

साभार:- दैनिक भास्कर

आप किसान सेवा केंद्र पर निशुल्क सम्पर्क कर सकते हैं:- 18001801551

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